नई दिल्ली / रामपुर:
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश की रामपुर जिला जेल में बंद कैदियों से भारी उगाही, नशीली दवाओं की तस्करी और जेल के भीतर से माफिया नेटवर्क संचालित होने के गंभीर आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग के डिप्टी रजिस्ट्रार (लॉ) मुकेश ने महानिदेशक (जांच) को पत्र लिखकर तत्काल एक विशेष टीम रामपुर जेल भेजने और मौके पर जांच कर 6 सप्ताह के भीतर 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' सौंपने का आदेश दिया है।
​यह ऐतिहासिक आदेश 'डीके फाउंडेशन ऑफ फ्रीडम एंड जस्टिस' के डायरेक्टर और सामाजिक कार्यकर्ता श्री दानिश खान द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत (केस नंबर: 6572/24/62/2026) पर आया है।
​शिकायत में लगाए गए मुख्य और झकझोरने वाले आरोप:
​कैदियों से जबरन वसूली: जेल प्रशासन द्वारा हर कैदी से कथित तौर पर ₹5,000 की अवैध वसूली की जा रही है। रकम न देने पर कैदियों को गंभीर शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी जाती हैं।
​नशीली दवाओं का कारोबार: जेल परिसर के भीतर धड़ल्ले से ड्रग्स और प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की बिक्री और तस्करी हो रही है।
​माफिया और जुआ नेटवर्क: जेल में बंद कुछ खूंखार अपराधी और माफिया तत्व अंदर से ही अपना क्रिमिनल सिंडिकेट चला रहे हैं और जेल के भीतर बड़े पैमाने पर जुआ खिलवाया जा रहा है।
​कैंटीन घोटाला: जेल कैंटीन के संचालन में पद का दुरुपयोग कर लाखों रुपये का अवैध वित्तीय लाभ कमाया जा रहा है।
​शिकायत करने पर धमकी: यदि कोई कैदी इन अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसे प्रताड़ित कर दूसरी जेलों में ट्रांसफर करने की धमकी दी जाती है।
​मानवाधिकार आयोग ने इन आरोपों को बेहद संवेदनशील और कैदियों के बुनियादी अधिकारों का हनन मानते हुए अपनी इन्वेस्टिगेशन डिवीजन को सीधे ग्राउंड पर उतरने को कहा है। इस कार्रवाई से यूपी जेल प्रशासन और रामपुर जिला जेल के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

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