(लोकेश कुमार)फरीदाबाद (हरियाणा) :-प्रवीण गुलाटी ने अपनी सेवा को निरंतर जारी रखते हुए एक बार फिर से प्लेटेल्स देने की सेवा को जारी कर रखा है बता दें कि आज 7 वीं बार अत्यधिक महत्वपूर्ण एमरजेंसी डेंगू के केस में जिनका नाम शाहनवाज है। जिनकी प्लेटेल्स मात्र 40000 रह गई थी उनको प्लेटेल्स दान कर एक अहम कार्य किया है , धर्म की दीवार ना हिला पाई सेवा की दीवार को। शाहनवाज पवन हॉस्पिटल सेक्टर 55 फरीदाबाद में एडमिट है वहा ना जा सका ।जिस कारण मैने प्लेटेल्स डिवाइन चेरिटेबल ब्लड बैंक फरीदाबाद एन आई टी में दी। आज बेहद खुशी है कि किसी के काम आ सका किसी की ज़िन्दगी बचा सका ।
प्रवीन गुलाटी पुत्र स्वर्गीय श्री अमर नाथ गुलाटी कहते हैं कि मेरा सामाजिक कार्य रक्तदान ओर प्लेटेलेस देना है और पुराने कपड़े एकत्रित करके बाटने का है जी। मे रक्तदान ओर प्लेटेलेस सिर्फ़ हॉस्पिटल में जरूरतमंद लोगों को ही देता हूं। में कभी भी किसी क्तदान शिविर में रक्तदान नही करता। पुराने न्यूज़ पेपर भी उन्हीं लोगो को देता हूं जिनको जरूरत होती है और वो कागज बना कर इस्तेमाल करते हैं। साल 2005 से अभी 2020 तक 32 बार रक्तदान ओर 6 बार प्लेटेलेस दिया है। कई जगह पुराने कपडे ओर न्यूज़ पेपर भी तभी 2005 से अभी तक देता है। मेरा एक नियम है में जब भी कोई अच्छा काम चाहे रक्तदान का हो या कपड़े बाटने का में कभी भी ज्यादा फ़ोटो नही लेता ओर ना ही जायदा किसी को भेजता हु। सेवा ओर दान तो वो होता हैं करो तो पता सबको चले पर ईमानदारी से। दिखावे से नही। में 15 सालों से सेवा कर रहा हु अभी तक ज्यादा किसी को भी नही पता क्योंकि में अपने नियम पर अटल हु ओर जायद दिखावा नही करता । साथ ही सेवा का मेवा लेने की कभी इच्छा नही हुई और ना ही ज्यादा नाम कमाने ओर करने की। सभी की सेवा करने का थोड़ा सा प्रयास करता हु जितना हो सके । साथ ही सभी के सहयोग से किसी की शादी में थोड़ा सा दान, विद्यालय में पड़ने वाले बच्चों के लिए पुरानी किताबो का भी इंतज़ाम करने की कोशिश करते है। साथ ही सेवा के रूप में पत्रकारिता भी करता हूँ। शिक्षा बी.ए दिल्ली विश्वविद्यालय 2008 दिल्ली से ओर एम.ए समाजशास्त्र 2011 में स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश से की हैं। व्यवसाय एस्कॉर्ट्स कंपनी में 10 साल से नोकरी कर रहा हूँ। पिता स्वर्गीय श्री अमर नाथ गुलाटी। माता स्वर्गीय श्रीमति मधु बाला। पत्नी और एक 4 साल की बेटी है।

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