जिला अधिकारी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई विकास कार्यो की मासिक समीक्षा बैठक



बहराइच 08 अक्टूबर। शासन के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले विकास कार्यों तथा नीति आयोग कार्यक्रमों की कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित मासिक समीक्षा बैठक में विभागवार समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी शम्भु कुमार ने निर्देश दिया कि सम्बन्धित अधिकारी भली भांति प्रगति से सम्बन्धित विवरण स्वयं परीक्षण कर त्रुटिरहित नये प्रपत्र के अनुसार उपलब्ध करायें। बैठक में अनुपस्थित अधिकाारियों के वेतन बाधित करने की कार्यवाई के साथ-साथ ऐसे अधिकारियों से सम्बन्धित बिन्दुओं की मुख्य विकास अधिकारी के साथ अलग से बैठक कर समीक्षा कराये जाने के निर्देश दिये।
जिलाधिकारी ने निर्माण कार्य से सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों कोे निर्देश दिया कि सम्बन्धित अन्य विभागों एवं कार्यदायी संस्था से समन्वय करते हुए कार्य की प्रगति, कार्य की गुणवत्ता, कार्य पूर्ण करने की अवधि, बजट की उपलब्धता आदि की स्वयं अपने स्तर से नियमित समीक्षा करते रहें साथ ही समय-समय पर निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण भी करते रहे जिससे निर्माण कार्य गुणवत्ता पूर्वक समय से पूर्ण हो सके।
मिशन अन्त्योदय की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने योजना से सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिया कि जीपीडीपी योजना में शामिल होेने वाले विभागीय कार्यो की सूची तैयार कर जिला पंचायत राज अधिकारी को उपलब्ध करायें जिससे आपके विभाग से सम्बन्धित कार्य को सम्मिलित किया जा सके। नई सड़कों का निर्माण, चैड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण, ओडीआर, एमडीआर सेतुओं के निर्माण की समीक्षा के दौरान अधि.अभि. प्रान्तीय खण्ड लो.नि.वि. द्वारा बताया गया कि सभी कार्य प्रगति पर है। इस सम्बंध में जिलाधिकारी द्वारा निर्देश दिये गये कि सभी कार्य गुणवत्ता के साथ समय से पूर्ण कराये जाय।
स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सीएमओ व सीएमएस को निर्देश दिया कि स्वीकृत पदों ंके सापेक्ष उपलब्ध स्टाफ का अपने स्तर से गहन परीक्षण कर यथा स्थिति से अवगत करायें। सीएमओ को यह भी निर्देश दिया कि विभाग से सम्बन्धित निर्माण कार्यो की अपने स्तर से गहन समीक्षा कर निर्माण कार्य को समय से पूर्ण कराये। इसके अलावा अन्य स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये।
इसी प्रकार भूगर्भ जल योजना, नहरों में टेल तक पानी पहुंचाना, कृषि, पशुपालन, वन, पंचायती राज, नगर निकाय, शिक्षा आदि विभागांे की योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ-साथ प्र्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री आवास योजना, राष्टीय ग्रामीण आजीविका मिशन, मनरेगा, ग्राम सड़क योजना, पेयजल परियोजना, खाद्य सुरक्षा, मत्स्य पालन, सभी प्रकार की पेंशन, छात्रवृत्ति, प्रधानमंत्री जन विकास योजना, शादी अनुदान योजना, कन्या सुमंगला योजना, बाल विकास एवं पुष्टाहार, दुग्ध समितियों का गठन, गन्ना मूल्य भुगतान, कौशल विकास, स्वरोजगार योजना, ओडीओपी, 50 लाख से अधिक लागत के निर्माण कार्य सहित अन्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया। नीति आयोग द्वारा निर्धारित इन्डीकेटर्स की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि विभागीय प्रगति से सम्बन्धित डेटा की फीडिंग पर विशेष ध्यान दिया जाय।
इस अवसर पर मुंख्य विकास अधिकारी कविता मीना, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. राजेश मोहन श्रीवास्तव, सीएमएस डा. डी.के. सिंह, डीएफओ मनीष सिंह, सीवीओ डा. बलवन्त सिंह, जिला विकास अधिकारी राजेश मिश्रा, पीडीडीआरडीए अनिल कुमार सिंह, उपायुक्त स्वतः रोजगार सुरेन्द्र कुमार गुप्ता, उप निदेशक कृषि डा. आर.के. सिंह, जिला कृषि अधिकारी सतीश कुमार पाण्डेय, जिला विद्यालय निरीक्षक राजेन्द्र कुमार पाण्डेय, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार यादव, डीपीआरओ उमाकान्त पाण्डेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी जी. डी. यादव, जिला अर्थ एवं सख्या अधिकारी अर्चना सिंह सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी मौजूद रहे।
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‘‘दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का पूरे देश में प्रथम स्थान‘‘
बहराइच 08 अक्टूबर। कृषि के साथ किसानों की जीविका पशुपालन से चलती रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पशु, कृषि, खाद, खाद्यान्न एवं ऊर्जा के अच्छे óोत रहे हैं। जनसंख्या की वृद्धि से उ0प्र0 देश का सबसे बड़ा प्रदेश होने के साथ ही यहाँ विकास की अपार सम्भावनायें हंै। पशुपालन प्रदेश मंें गरीब, ग्रामीण, जीवन की आजीविका के प्रमुख आधार रहे हैं। गाय, भैस, बकरी, भेड़, सुअर, मुर्गी आदि पशुधन कृषि के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रदेश सरकार पशुधन विकास के क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रमों उन्नत प्रजनन, पशु रोग नियंत्रण, उन्नत पशुपोषण,  आधुनिक पशुधन प्रबन्धन आदि के माध्यम से दुग्ध व पशुधन की उत्पादकता में वृद्धि कर रही है। सरकार के कार्यक्रमों से गरीब पशुपालकों, निर्बल वर्ग के व्यक्तियों, भूमिहीन श्रमिकों की आजीविका तथा उनका आर्थिक उन्नयन हो रहा है, साथ ही उनका कुपोषण भी दूर हो रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादन हेतु किये गये विभिन्न कार्यो का ही परिणाम है कि उ0प्र0 देश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में प्रथम स्थान पर है।
प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने पशुधन विशेषकर गोवंश के संरक्षण पर विशेष बल दिया है। निराश्रितध्बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए प्रदेश में कई वृहद गोसंरक्षण केन्द्र बनाये गये हैं। पशुधन के सर्वांगीण विकास हेतु पशुपालकों, कृषकों के हित में संचालित लाभकारी योजनाओं मंे गति प्रदान करने के लिए नये-प्रयोगों के साथ प्रदेश में नई योजनाओं के माध्यम से कार्यक्रम लागू किये जा रहे हैं। प्रदेश सरकार की नीति है कि किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुना किया जाय। किसानों की आय में वृद्धि हेतु पशुपालन बहुत ही सहायक है। सरकार पशुपालन हेतु नवीन व समृद्धशाली योजनायें बनाई जा रही है जिससे दुग्ध उत्पादन के साथ-साथ पशुपालकोंध्कृषकों की आय में वृद्धि हो सके। वर्ष 2017 की 20 वीं पशुगणना के अनुसार प्रदेश में पशुओं की कुल संख्या 680.13 लाख है, जिनमें  190.20 लाख गोवंशीय, 330.17 लाख महिषवंशीय, 9.85 लाख भेड़, 144.80 लाख बकरी, 4.08 लाख सूकर एवं 1.03 लाख अन्य पशुधन तथा 125.16 लाख कुक्कुट हैं।
प्रदेश मंें राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत खुरपका, मुॅहपका एवं बु्रस्लोसिस बीमारी को 2025 तक पशुओं के रोग से मुक्त कराने का लक्ष्य रखा गया है। पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। पशु चिकित्सालयों से दूरस्थ ग्रामों में बहुउद्देशीय सचल पशु चिकित्सा सेवायंे दी जा रही है। गुणवत्तायुक्त पशु प्रजनन के लिए कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रमों के माध्यम से दुधारू पशुओं की नस्ल में सुधार किया जा रहा है। पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देते हुए पशुधन बीमा योजना भी संचालित है। पशुपालकों को जागरूक एवं उनकी क्षमता में विकास करने के लिए पं0 दीन दयाल उपाध्याय वृहद पशु आरोग्य मेलों का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश सरकार पशुपालन हेतु पशुपालकोंध्कृषकों को विभिन्न प्रकार की सहायता कर रही है। जिससे प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ा है और पूरे देश मंे उ0प्र0 दुग्ध उत्पादन मंे प्रथम स्थान पर है।
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जनपद के 08 अलग-अलग स्थान घोषित किये गये कन्टेनमेन्ट ज़ोन  
बहराइच 08 अक्टूबर। जनपद के तहसील मिहींपुरवा (मोतीपुर) अन्तर्गत ग्राम जोगनिया, तहसील पयागपुर अन्तर्गत ग्राम तिलहरा व ग्राम शुकुलपुरवा गुरचाही, तहसील नानपारा अन्तर्गत ग्राम गंगापुर, गिरधरपुर व ग्राम कोदरैला तथा तहसील महसी अन्तर्गत ग्राम बेहड़ा में 01-01 व्यक्ति के पीड़ित/संक्रमित पाये जाने के फलस्वरूप जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सम्बन्धित क्षेत्र को कन्टेनमेन्ट ज़ोन घोषित करते हुए तत्काल प्रभाव से कोविड-19 के फैलाव को रोकने एवं बचाव व नियंत्रण किये जाने के उद्देश्य से सम्बन्धित क्षेत्रों तथा उसके आस-पास के क्षेत्र को निर्धारित प्रोटोकाल के अनुसार अग्रिम आदेश तक अस्थायी रूप से सील किये जाने एवं सम्पूर्ण क्षेत्र में प्रवेश एवं निकास तथा वाहनों के संचालन को अपरिहार्य स्थिति को छोड़कर प्रतिबन्धित किये जाने के आदेश जारी किये गये हैं।
उक्त अवधि में निर्धारित प्रोटोकाल के अनुसार सम्बन्धित ग्राम/मोहल्लों में रहने वाले समस्त व्यक्ति अपने-अपने घरों (इन्डोर) में ही रहेंगे। इस आदेश का उल्लंघन उपरोक्त अधिसूचना के प्रस्तर-15 में प्रदत्त व्यवस्था के अनुसार भा.द.सं. की धारा-188 के अधीन दण्डनीय अपराध माना जायेगा। गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी कन्सालीडेटेड गाईड लाइन्स के क्रम में मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन के आदेश दिनांक 06 व 07 अक्टूबर 2020 के अपरान्ह से अनुपालन में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा कन्टेनमेन्ट ज़ोन के लिए नोडल अधिकारी/सहायक नोडल अधिकारी तथा नोडल पुलिस अधिकारी व सहायक नोडल पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गयी है। कोविड-19 के संक्रमण के एकल प्रकरण वाले शहरी क्षेत्र में 100 मीटर अथवा पूरा मोहल्ला, जो भी कम हो कन्टेनमेन्ट ज़ोन होगा तथा ग्रामीण क्षेत्र में राजस्व गांव का सम्बन्धित मजरा कन्टेनमेन्ट ज़ोन होगा।
कन्टेनमेन्ट ज़ोन क्षेत्रों के अन्दर एवं बाहर किसी भी व्यक्ति, वाहन इत्यादि को आवागमन की अनुमति नहीं होगी, सिवाय ऐसी स्थिति के जो चिकित्सीय आपातकालीन स्थिति और आवश्यक वस्तुओं/सेवाओं की आपूर्ति से सम्बन्धित हों। कन्टेनमेन्ट ज़ोन में अन्तिम धनात्मक रोगी के सैम्पल कलेक्शन की तिथि से 14 दिनों तक सम्बन्धित क्षेत्र कन्टेनमेन्ट ज़ोन बना रहेगा। यदि उक्त तिथि के 14 दिन उपरान्त तक सम्बन्धित क्षेत्रों में कोई अन्य केस नहीं पाया जाता है तो कन्टेनमेन्ट ज़ोन को सूची से विमुक्त कर दिया जायेगा।
जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नामित मजिट्रेटों/पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि कोविड-19 के फैलाव को रोकने एवं बचाव व नियंत्रण के दृष्टिगत कन्टेनमेन्ट ज़ोन की बैरीकेटिंग कराते हुए शासन द्वारा दिये गये निर्देशों के अनुरूप सुरक्षात्मक प्रोटोकाल एवं सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से अनुपालन कराना सुनिश्चित करेंगे। इस आदेश का उल्लंघन पाये जाने पर डिजास्टर मैनेजमेन्ट एक्ट, 2005 की धारा-51 से 60 तथा भारतीय दण्ड विधान की धारा-188 में दिये गये प्राविधानों के अन्तर्गत कार्यवाही की जायेगी।
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राजस्व कार्यो की समीक्षा बैठक आज
बहराइच 08 अक्टूबर। जिलाधिकारी शम्भु कुमार की अध्यक्षता में 09 अक्टूबर 2020 को पूर्वान्ह 11ः30 बजे कलेक्ट्रेट सभागार में राजस्व कार्यो की समीक्षा बैठक आयोजित की गयी है।

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