"युवा शक्ति जिंदाबाद" अहिंसात्मक क्रांति अमर रहे"शांतिपूर्ण ढंग से की गई अहिंसात्मक अभिव्यक्ति को सलाम

दिसंबर 2023
   प्रेस वार्ता स्थान         सत्यपथ         गोरखपुर

"युवा शक्ति जिंदाबाद" अहिंसात्मक क्रांति अमर रहे"
शांतिपूर्ण ढंग से की गई अहिंसात्मक अभिव्यक्ति को सलाम
क्रांतिकारी सागर' अनमोल' मनोरंजन' नीलम' ललित' विक्रम को सलाम'।बेरोजगारी गरीबी विषमता बलात्कार हिंसा भ्रष्टाचार हिंदू मुस्लिम नफरत जातीय जहर महंगाई मुर्दाबाद

सुरक्षा में चूक की बात की गई है। इसकी नौबत क्यों आई ?
कुछ लोगों ने कहा कि यह 13 दिसंबर 2001 में संसद पर किए गए हमले की वर्षगांठ की पुनरावृत्ति है। मैं कहता हूं 94 वर्ष 8 मा 15 दिन पूर्व भगत सिंह बटुकेश्वर दत्त द्वारा सदन के दर्शक दीर्घा से फेके गए बम"बहरों को सुनाने" की पुनरावृत्ति है तब भारत का वायसराय लॉर्ड इरविन ब्रिटिश भारत का प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडॉनल्ड और संसद की प्रोसिडिंग सरदार विट्ठल भाई पटेल कर रहे थे। गुलामी से आजादी उस बम ब्लास्ट का कारण था परंतु आज हिंद के हिंदुस्तानी लुटेरों एवं हिंदू मुस्लिम नफरत फैलाने वालों से मुक्ति उद्देश्य है।

 मैं इसे बेरोजगारी गरीबी विषमता बलात्कार हिंदू मुस्लिम नफरत जातीय जहर भ्रष्टाचार भय जुर्म की सत्ता के विरुद्ध एक "अहिंसात्मक शांतिपूर्ण क्रांति" 'Revolution with Peace" मानता हूं। इनकी तुलना भगत सिंह राजगुरु सुखदेव बटुकेश्वर दत्त पंडित बिस्मिल अशफ़ाकउल्ला खान रोशन सिंह राजेंद्र लाहिड़ी चंद्रशेखर आजाद से की जा सकती है।

घटना का कारण:--
"तानाशाही नहीं चलेगी" जय भीम" जय भारत "
सरकार उनके जैसे लोगों का दमन कर रही है उन्हें पीटा जा रहा है और जेलों में डाला जा रहा है"
                                            क्रांतिकारी नीलम के नारे
"भारत एक भयावह स्थिति में है"' क्रांतिकारी सागर''का 15 फरवरी का पोस्ट। "धर्म के नाम पर लूट का चरित्र है" अयोध्या में हनुमानगढ़ी में पुजारी एवं दुकानदारों द्वारा लड्डू फेंकने की घटना के बाद' 
मंदिर के नीचे सोने की एट गाड़ना  लाखों  दीया जलाना किसके पैसे से? चंदे के पैसे से। चंदा चोरी है।

जांच का प्रश्न खड़ा हो गया। CRPF के महानिदेशक इसकी जांच करेंगे। बेरोजगारों को रोजगार दे दें ताकि उनकी गरीबी मिट जाए इस महान मुल्क को अंधविश्वास पाखंड हिंदू मुस्लिम नफरत की जमीन न बनाएं। विषमता महंगाई नारी बलात्कार हिंसा भय बंद करें। जांच को "सत्य"तक पहुंचना चाहिए। सत्य यह है कि भारत हिंसा बलात्कार भय गरीबी बेरोजगारी हिंदू मुस्लिम नफरत जातीय जहर का मुल्क बन गया है या सत्ता की भूख मिटाने के लिए नेताओं ने बना दिया है। लोगों में सदन के प्रति सम्मान समाप्त हो चुका है। मैं निजी तौर पर सदन को उतना ही सम्मान देता हूं जितना गांधी भगत सिंह अशफ़ाकउल्ला देते थे।

यदि किसी तरह की कार्रवाई करनी है तब सदन में बैठने वाले क्रिमिनल्स करप्ट रेपिस्ट (अच्छे को छोड़कर) की जांच करके इनके विरुद्ध करनी चाहिए । 

आज जहां भारत पहुंचा है उसके लिए विधायिका के सदस्य एवं मंत्री जिम्मेदार हैं आजादी 76 वर्षों में इन लोगों ने भारत को कहां पहुंचा दिया। बेरोजगारी गरीबी नफरत का मुल्क।

पूर्वांचल गांधी          सत्यपथ
9415418263

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