नोटबन्दी बनी काले धन की कवच

 


नोटबन्दी बनी काले धन की कवच

       भ्रष्टाचार और काले धन के प्रतिगामी व्यक्तित्व व विकल्प तलाश मे देश के नागरिकों ने स्वयं की हिफाजत की प्रत्याशा मे  बन्दर के हाथ छुरा थमाने की गल्ती की है, नाक तो कटेगी ही। दर्द मे चीखने, तड़पने और फड़फड़ाने से पीड़ा का शमन संभव नही, दर्द निवारक दवा ही आखिरी कारगर उपाय है। यदि विमुद्रीकरण काले धन और आतंकवाद पर नियंत्रण के उद्देश्य से किया गया होता, "तब काले धन संचयन,हस्तांतरण और व्यवसायिक लेन देन के स्थान और मद पर प्रहार होता।" जब विश्व बैंक सम्पत्ति डाटा और CBDT ने 2013 -14 मे ही समस्त स्रोतों को सरकार के संज्ञान  मे लाकर सूचना उपलब्ध करा दिया था," तब उस आख्या पर कार्यवाही की बजाय विमुद्रीकरण के आत्मघाती पथ पर चलने को प्राथमिकता क्यों दी गयी? विश्वस्त हूँ;यह आत्मघाती नही सामूहिक लूट का फैसला था। सियासत मे जैसा दिखता है होता नही,जो होता है दिखता नही ।

     यदि मोदी सरकार ईमानदार होती,"तब काले धन पर कार्यवाही के प्रति कर्मयोद्धा होती और दायित्वों के प्रति जवाबदेह भी।" CBDT( central board of direct tax ) और विश्व बैंक द्वारा तैयार रिपोर्ट जो  कि संसद पटल पर रखी जा चुकी है; उस काले धन सम्बंधित रिपोर्ट पर संसद मे बहस कराती। रिपोर्ट मे स्पष्ट उल्लेख है कि कालेधन के उपयोग के अंतर्वाह और नि:स्त्राव अधिकता वाले स्त्रोत है केमिकल और केमिकल उत्पादन, भूमि परिवहन, कृषि,विद्युत,  पेट्रोलियम उत्पादन,संचार, खनन, मशीनरी निर्माण और अन्य व्यापारिक सेवाएं। रियल इस्टेट, सोना और आभूषणों के क्षेत्र मे अगणनीय सम्पत्तियां अर्जित की गई है। मेडिकल, फैशन, कानूनी पेशे पूर्णतया नकद लेन देन पर निर्भर है कालेधन खपत के यह प्रभावशाली क्षेत्र हैं। अमेरिका, इंग्लैंड, चीन, मेक्सिको, हांग कांग, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड और सिंगापुर जैसे देशों के आयात और निर्यात अवैध धन पर ही आश्रित है। आखिर क्यों इस रिपोर्ट पर संसद मे बहस कराने से मोदी सरकार बचना चाहती है-कहीं  अम्बानी का तीसरा नेत्र तो नही भयभीत कर रहा है ? सरकारी उपक्रम  ONGC को आवंटित तेल खनन को अम्बानी को हस्तांतरित करने की पोल खुलने का भय तो नही सता रहा है या रेलवे को तेल आपूर्ति करने के ठेके मे किये गये घाल-मेल का भूत निकल कर सार्वजनिक होने का भय ?

      अब भी कोई वजह और विकल्प है जो भ्रम मे डाल सके की विमुद्रीकरण समानान्तर और अवैध धन पर प्रतिबंध व आतंकवादी घटनाओं पर  शिकंजा कसने के लिए किया गया था?जब काले धन का उपयोग करने वाले संस्थानों पर संसद मे चर्चा तक की जहमत नही उठायी जा रही है तो लगाम और प्रतिबंध का दिवास्वप्न ही सबसे बड़ा भ्रम है। यदि आतंकवाद कालेधन पर निर्भर होता तो उसकी गतिविधियां नगण्य हो जाती, स्थगित हो जाती। सरकार के हाथ में देश की समस्त इंटेलिजेंस सर्विस है जैसे: राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO), RAW( Research and Analysis Wing ), IB( Intelligence Bureau) , NCB(Narcotics Control Bureau) ,JCB( Joint Cipher  Bureau), DIA  ( Defence Intelligence Agency ), SID ( Signal Intelligence Directorate) । इन संगठनों की सक्रियता के  बावजूद आतंकवादी घटनाएं बढ़ने के क्या अर्थ हैं ?कहीं ऐसा तो नही बढ़ते आतंकवादी घटनाओं के पीछे NCB की सक्रियता अधिक हो और आतंकवाद से जुझने के सरकारी पोशाक मे किसी अलग ही प्रहसन का मंचन हो रहा हो ? अब तो यही कहना प्रासंगिक है: 

      दिल के फफोले जल उठे सीने की दाग से l  

      इस घर  को आग लग गई घर के चराग से ll  

गौतम राणे सागर,

राष्ट्रीय संयोजक,

 संविधान संरक्षण मंच ।

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