कोरोना मृतक परिवारों को आसानी से दी जा सकती है अनुग्रह राशि


 सरकार और उच्चतम न्यायालय के बीच संघर्ष चल रहा है या आपसी धींगामुस्ती? ख़ैर चर्चा की विषयवस्तु कोरोना की चपेट में आकर होने से मौते हैं। उच्चतम न्यायालय कहता है कि कोरोना से हुई लगभग 4 लाख मौतों की जो  सरकारी आकड़ों में दर्ज है; को अनुग्रह राशि देना चाहिए। धनराशि क्या होगी यह सरकार स्वयं तय करे। 

      सरकार फ़ितरत के रथ पर सवार होकर अपनी छद्म रणनीति के तहत जवाब देती है कि अनुग्रह राशि देना व्यवहारिक रूप से संभव नही है। बजट में राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में कुल ₹22138 करोड़ का प्राविधान है। यदि इस राशि से ₹16000 करोड़ कोरोना मृतक के अनुग्रह के रूप में खर्च कर दिया गया तो बाकी आने वाली आपदाओं से निपटना संभव नही होगा। 

           तरीके मैं सुझाता हूँ। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वर्ष 2020-2021 में शुद्ध मुनाफा कमाया ₹55461करोड़ ।लेकिन सरकार ने इनसे ₹13726 करोड़ का आयकर वसूलने की बरक्स आयकर वसूला मात्र ₹1722 करोड़ । यानि कि ₹ 12004 करोड़ कम। सरकार को रिलायंस इंडस्ट्रीज को ₹12004 करोड़ की दी गई दहेज़ की राशि को वापस ले लेना चाहिए। अब अवशेष ₹4000 करोड़ की व्यवस्था के लिए जगन्नाथ मंदिर या बालाजी मंदिर के चढ़ावे की राशि ले लेनी चाहिए। यदि इन उपक्रमों के बावजूद अर्थ की कमी पड़े तो अन्य धार्मिक स्थलों से देश के नागरिकों की मदद व मजबूत राष्ट्र निर्माण के लिए चढ़ावे को सरकार खजाने में जमा कराने में हिचक नही करनी चाहिए ।

          सरकार को यह संज्ञान लेना चाहिए कि भारत में दहेज़ देना कानूनी तौर पर अपराध है। सरकार इन गद्दार उद्योगपति दामादों को दहेज़ देने से बचे। यदि सरकार इन दामादों को दहेज़ देने में अनवरत लिप्त रहती है तो यह संभावना प्रबल बनेगी की कहीं सरकार के दो मुख्य धुरी की इन दामादों के व्यवसाय में मोटा हिस्सा तो नही है?

*गौतम राणे सागर*

    राष्ट्रीय संयोजक,

संविधान संरक्षण मंच ।

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