बिहारी जी कॉरिडोर विवाद के पीछे ‘नकली पेड़े’ का खेल..? समाजसेवी ने खोली पोल, प्रशासन को दिया बड़ा ‘नुस्खा’

दुकानों के पीछे 'मायाजाल': डेढ़ लाख तक का किराया और मिलावट का धंधा
संवाददाता आलोक तिवारी 
​वृंदावन। ठाकुर बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर निर्माण में आ रही अड़चनों के पीछे अब एक नया और चौंकाने वाला आर्थिक पहलू सामने आया है। प्रखर समाजसेवी समीर शुक्ला ने कॉरिडोर विरोध की असली जड़ पर प्रहार करते हुए दावा किया है कि यह विवाद आस्था का नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के ‘अवैध’ मुनाफे का है। उनके अनुसार, मंदिर के आसपास बिकने वाले नकली पेड़े और दुकानों से आने वाला मोटा किराया ही कॉरिडोर की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है।

श्री ​शुक्ला ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि बिहारी जी कॉरिडोर की जद में आने वाले कई व्यापारिक प्रतिष्ठान नकली पेड़ा और मिलावटी खाद्य सामग्री बेचकर श्रद्धालुओं की सेहत से लंबे समय से खिलवाड़ कर रहे हैं। इस काले कारोबार से दुकानदारों को बेतहाशा आमदनी हो रही है, जिस कारण भवन मालिकों को एक-एक दुकान से एक से डेढ़ लाख रुपये प्रति माह तक का किराया मिल रहा है। यही ‘आर्थिक लालच’ भवन स्वामियों को अपनी संपत्ति स्वेच्छा से देने से रोक रहा है।
​समाजसेवी ने इस गतिरोध को खत्म करने के लिए प्रशासन को एक कड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन दो मुख्य कदम उठाए, तो कॉरिडोर का विरोध काफी हद तक स्वतः समाप्त हो जाएगा।
​उनका मानना है कि दुकानों पर बिक रहे नकली पेड़े और मिलावटी सामान पर खाद्य विभाग की सख्त छापेमारी हो।
​इसके अलावा मंदिर के भीतर बाहर से लाई गई किसी भी खाद्य सामग्री के ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
​”जैसे ही इन दुकानों की व्यावसायिक वैल्यू गिरेगी विरोध करने वाले खुद-ब-खुद समझौते की मेज पर आ जाएंगे।
​समीर शुक्ला ने तर्क दिया कि जब वृंदावन के अन्य प्रतिष्ठित मंदिरों, जैसे राधावल्लभ मंदिर में केवल अधिकृत दुकानों का ही प्रसाद मान्य है और बाहरी सामग्री प्रतिबंधित है तो बांके बिहारी मंदिर में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? उन्होंने सुरक्षा कारणों का भी हवाला देते हुए कहा कि मंदिर परिसर में किसी भी अनधिकृत वस्तु का प्रवेश रोकना श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

​अब गेंद मंदिर कमेटी और जिला प्रशासन के पाले में है। क्या प्रशासन इस ‘आर्थिक चोट’ वाले सुझाव पर अमल करेगा? अगर बाहरी सामग्री और नकली उत्पादों पर लगाम लगती है, तो बांके बिहारी कॉरिडोर का मार्ग न केवल प्रशस्त होगा बल्कि श्रद्धालुओं को शुद्ध प्रसाद और सुरक्षित दर्शन भी मिल सकेंगे।

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