अटरिया,पुलिस की ढीली 'पकड़', 4 महीने बाद भी 20 लाख की चोरी अनसुलझी;

अटरिया,पुलिस की ढीली 'पकड़', 4 महीने बाद भी 20 लाख की चोरी अनसुलझी; पत्रकार के घर हुए बड़े कांड से लेकर चौकीदार पर हमले तक, अपराधों की झड़ी!

 क्षेत्र के अटरिया थाना क्षेत्र में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 4 महीने पहले हुई एक सनसनीखेज ₹20 लाख की चोरी का मामला अब भी अनसुलझा है, जबकि हाल ही में चौकीदार के साथ मारपीट और लूट की घटना ने लोगों में भय और आक्रोश भर दिया है।

 पत्रकार के घर 20 लाख की 'सनसनीखेज' चोरी: 120 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली

30/31 जुलाई, 2025 की रात अटरिया संवाददाता योगेंद्र कुमार पांडे के घर हुई ₹20 लाख की बड़ी चोरी अटरिया पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। चोरों ने छत के रास्ते घर में घुसकर, परिवार को एक कमरे में बंद कर दिया और लाखों की नकदी तथा गहनों पर हाथ साफ कर दिया था।

घटना के तुरंत बाद पुलिस ने जल्द कार्रवाई का दावा किया था, लेकिन 120 दिन (चार महीने) बीत जाने के बाद भी अपराधी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इस मामले में पुलिस की धीमी जांच गति से पीड़ित और स्थानीय लोग बेहद निराश हैं। लोगों का कहना है कि इतने बड़े मामले में पुलिस का सुस्त पड़ना या तो उनकी कार्यप्रणाली में कमी को दर्शाता है, या फिर यह जानबूझकर मामले को दबाने की कोशिश है।

 नहीं थम रही वारदातें: चौकीदार को बांधकर पीटा और लूटा

जहां एक तरफ पुरानी वारदातें अनसुलझी हैं, वहीं दूसरी तरफ चोरों के हौसले लगातार बुलंद हैं। बीते दो दिन पहले, अटरिया के बहादुरपुर रोड पर स्थित एक भट्टे के चौकीदार को भी चोरों ने निशाना बनाया। अज्ञात लुटेरों ने चौकीदार को चारपाई से बांधकर उसके साथ मारपीट की और उसके पास से कुछ पैसे लूट लिए। इतना ही नहीं, चोर मौके पर मौजूद एक जनरेटर का एलटीनेटर खोलकर भी फरार हो गए।

पीड़ित चौकीदार ने स्थानीय थाने में तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई है।

 लोगों में आक्रोश: क्या आम आदमी सुरक्षित है?

इन लगातार हो रही घटनाओं ने स्थानीय लोगों में भय और रोष भर दिया है। उनका सीधा सवाल है कि अगर पुलिस ₹20 लाख की बड़ी चोरी जैसी घटना को चार महीने में भी नहीं सुलझा पा रही है, तो आम लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी भी जारी है और वे जल्द ही मामलों को सुलझा लेंगे, लेकिन जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह सवाल बना रहेगा कि क्या पुलिस सच में अपराधियों पर अपनी पकड़ मजबूत कर पाएगी, या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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