मथुरा के लाल का बलिदान सूरजकुंड में लोगों को बचाते हुए शहीद हुए इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद

मथुरा के लाल का बलिदान सूरजकुंड में लोगों को बचाते हुए शहीद हुए इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद

संवाददाता आलोक तिवारी 
मथुरा। अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में कर्तव्य निभाते हुए लोगों की जान बचाने के दौरान शहीद हुए इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद मथुरा जमुनापार क्षेत्र के गांव डेंगरा के निवासी थे। इस हृदयविदारक घटना की खबर जैसे ही मथुरा पहुंची पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। हर आंख नम हो गई और हर दिल ने मथुरा के इस वीर सपूत को नमन किया।


1988 में पुलिस सेवा में दारोगा के पद से भर्ती हुए जगदीश प्रसाद अपनी ईमानदारी साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। वर्षों की निष्ठापूर्ण सेवा के बाद वह इंस्पेक्टर बने और कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। हाल ही में उनका तबादला पलवल हुआ था और सूरजकुंड मेले में उनकी ड्यूटी लगी थी। इसी दौरान उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों को बचाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।

जगदीश प्रसाद के परिवार में पत्नी सुधा शर्मा दो बेटियां निधि व दीप्ति और बेटा गौरव हैं जो वर्तमान में सोनीपत पुलिस लाइन में रह रहे हैं। गांव डेंगरा में उनके पिता सूरजमल और माता शांति देवी रहते हैं। जैसे ही शहादत की खबर गांव पहुंची घर पर शोक संतप्त ग्रामीणों का तांता लग गया। पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया।

परिवार ने बताया कि वर्ष 2019-20 में राज्यपाल द्वारा उन्हें पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उनके साहस और उत्कृष्ट सेवा का प्रमाण था। मथुरा के इस लाल की शहादत पर क्षेत्र के लोगों ने गर्व के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की और सरकार से शहीद का दर्जा तथा परिवार को समुचित सम्मान और सहायता देने की मांग की।
अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में कर्तव्य निभाते हुए लोगों की जान बचाने के दौरान शहीद हुए इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद का रविवार को उनके पैतृक गांव डेंगरा में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पूरे गांव में शोक और गर्व का भाव एक साथ नजर आया।

शहीद की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जैसे ही गांव पहुंचा भारत माता की जय और वीर जवान अमर रहें के नारों से वातावरण गूंज उठा। हर आंख नम थी और हर दिल मथुरा के इस वीर सपूत को नमन कर रहा था।

अंतिम संस्कार से पहले पुलिस जवानों ने शस्त्र सलामी दी और पूरे विधि विधान के साथ राजकीय सम्मान प्रदान किया गया। परिवारजनों का रो रोकर बुरा हाल था। गांव की गलियों में मातम पसरा रहा और हर कोई इस बलिदान पर गर्व के साथ श्रद्धांजलि अर्पित करता नजर आया।

मथुरा के लाल इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद का यह सर्वोच्च बलिदान सदैव याद रखा जाएगा। उनका साहस और कर्तव्यनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर अमर रहेगी।

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