प्रतीत होता है अखिलेश यादव ने 2027 के विधान सभा चुनाव में एक बार फिर बीजेपी को जिताने की सुपारी ले चुके हैं। एक बार फिर शब्द आपको कचोट रहा होगा। जी हाँ! 2022 विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी अपने दम पर नही जीती थी अखिलेश यादव का आंतरिक सहयोग उसके जीत में सहायक बना था।
यदि आप अपने दिमाग़ पर जोर डाले तो स्मरण हो जाएगा कि केन्द्र सरकार की महामारी को कंट्रोल करने की नाकारा व्यवस्था ने पूरे देश को श्मशान घाट में तब्दील कर दिया था। हर तरफ लाशें ही लाशें दिख रही थी लेकिन अखिलेश जी की जिह्वा पर कभी भी केन्द्र सरकार को दोषी ठहराने का एक शब्द सरसराहट में नही आया।
वह हमेशा योगी को गोरखपुर भेजने और गुल्लू को बिस्किट लेते जाने की ठिठोली करते रहे। अब भी या तो वह समझ नही पा रहे या फिर रणनीति के तहत ममता की तरह बीजेपी के लिए बैटिंग कर रहे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि इनके PDA के P का मतलब पंडित है जो इन्हें शुभ और अशुभ का ज्ञान कराता है। आप सभी को ज्ञात होगा अखिलेश जी ख़ुद स्वीकार करते हैं कि शूद्र होने के नाते ही 5 कालिदास मार्ग को गोबर से सफ़ाई किया गया था जब उन्होंने 2017 में मुख्यमंत्री आवास ख़ाली किया था।
अखिलेश जी को यह भी याद रखना चाहिए कि ब्राह्मण धार्मिक ग्रंथों में शूद्र के राज्याभिषेक के लिए कोई मंत्र ही नही है फिर पंडित आपको जीत का आशीर्वाद कैसे दे सकता है? अखिलेश ख़ुद को हिन्दू मानते हैं उनकी मान्यता उचित है लेकिन ब्राह्मण कभी हिन्दू नही हो सकता वह तो सनातनी है जिसका बाप इस्राइल है। हिन्दू और सनातनी दोनों परस्पर विरोधी विचारधारा है, एक दूसरे के खिलाफ़ युद्धरत हैं। अखिलेश को दोस्त और दुश्मन की पहचान होनी चाहिए आस्तीन में सांप पालेंगे तो उसी तरह निगल लिए जाएंगे जैसे ममता निगली गई है।
सनद रहे ममता ने हमेशा विपक्ष की धार को कुंद करके परोक्ष रूप से बीजेपी के पक्ष में खड़ी रही हैं। जैसे ही राज्यसभा में बीजेपी का बहुमत हुआ ममता को उन्होंने दूध से मक्खी की तरह निकालकर फेंक दिया।
* गौतम राणे सागर*
राष्ट्रीय संयोजक
संविधान संरक्षण मंच।
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