24 मुहर्रम: इमाम सज्जाद (अ.स.) के यौम-ए-शहादत पर बदायूँ में मजलिस और शब-ए-दारी का आयोजन, गमगीन माहौल में बरामद हुआ ताबूत

बदायूँ।चौथे इमाम हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन इब्ने इमाम हुसैन (अ.स.) के यौम-ए-शहादत (24 मुहर्रम) के मुकद्दस मौके पर 'कारवाने अज़ा टीम, बदायूँ' की जानिब से एक अज़ीम-उश-शान मजलिस-ए-अज़ा और शब-ए-दारी का आयोजन किया गया। इस गमगीन माहौल में भारी तादाद में अज़ादारों ने शिरकत कर बारगाहे-रिसालत में पुरसा पेश किया।
मौलाना ज़मान बाकरी ने बयां किए कर्बला के मसायब
मजलिस को खिताब करने के लिए रामपुर से तशरीफ लाए आलीम-ए-दीन मौलाना सय्यद मोहम्मद ज़मान बाकरी साहब ने इमाम सज्जाद (अ.स.) की सवाने-हयात (जीवन) और उनकी लासानी कुर्बानियों पर तफ़्सील से रोशनी डाली। मौलाना ने जब कर्बला के मसायब और असीरी (कैद) के दौरान इमाम सज्जाद (अ.स.) पर ढाए गए ज़ुल्म व सितम का ज़िक्र किया, तो पूरी महफ़िल में कोहराम मच गया और अज़ादारों की आँखों से अश्क जारी हो गए।

शबीह-ए-ताबूत की बरामदगी पर रो पड़े अज़ादार
मौलाना की मजलिस के इख्तेताम (समापन) के बाद माहौल उस वक्त और ज़्यादा गमगीन हो गया जब इमाम सज्जाद (अ.स.) का शबीह-ए-ताबूत बरामद किया गया। मौला के ताबूत को देखते ही अज़ादारों के सब्र का बांध टूट गया और हर आंख नम हो गई।

 बाहरी अंजुमनों ने पेश किया नज़राना-ए-अकीदत
कारवाने अज़ा टीम के सदर ज़ैनुल इबा ज़ैदी ने बताया कि इस मजलिस और शब-ए-दारी में मुल्क की नामचीन मेहमान अंजुमनों ने शिरकत की। जिसमें मुख्य रूप से: अन्जुमन हैदरी (रजि०) सांखनी, बुलंदशहर
अंजुमन हैदरी सैंथल, बरेली इन अंजुमनों के नौहाख्वानों ने पूरी रात दर्दभरी नौहाख्वानी और पुरजोश सीनाज़नी (मातम) कर मौला का पुरसा दिया। मजलिस का संचालन (निज़ामत) ग़ुलाम अब्बास ने अपने रिवायती और पुरअसर अंदाज़ में किया।

कार्यक्रम के आखिर में कारवाने अज़ा टीम के नायाब सदर जुनैद अब्बास और सेक्रेटरी फजले अहमद ने मजलिस में तशरीफ लाए तमाम अज़ादारों, अंजुमनों और मेहमानों का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया।

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