भारतीय परिवेश में नौटंकी का एक अविस्मरणीय इतिहास रहा है। कई नौटंकी पार्टियां उनमें शामिल मसखरों के दम पर हिट रहती हैं। आम जनमानस के बोझिल मन और थके तन को गुदगुदाती जोकरों की टिप्पणियां और भाव-भंगिमाएं मालिश का अहसास कराती हैं।
थकावट दूर और मस्तिष्क को हल्का कर व्यक्ति को सक्रिय कर देती हैं। हल्के फुल्के अंदाज में बोली जाने वाली अश्लील व बिना सिर पैर की बहरत अनायास ही मनुष्यों को खिलखिला कर हँसने का अवसर उपलब्ध करा देती है।
हंसी-मज़ाक के महौल लोगों को थोड़ी देर के लिए जीवन के दर्द भुलाने में कारगर उपाय है, परन्तु यह बस थोड़े समय के लिए है। तदोपरान्त सभी को मनुष्य जीवन के आपा-धापी में खोना पड़ता है। जीवन की नैया खेने के उपक्रम करने पड़ते है।
दायित्वों के अनुपालन में दैनिक रूप से दैहिक भट्टी में तपना पड़ता है। आखिरकार हर किसी को परिवार की जरूरत पूरी करनी ही पड़ती है। सोचे: उसके परिवार की क्या दुर्दशा होगी जिसने जिम्मेदारी से मुँह मोड़ कर हमेशा हसगुल्ले में अपने को प्रायोजित कर रखा है!
विगत कुछ वर्षों में अधिकांश भारतीयों ने एक नया शौक पाल लिया है। एक अंतर्राष्ट्रीय मसखरे को प्रधानमंत्री जैसे जिम्मेदार ओहदे पर आरूढ़ कर आये दिन उससे शेखचिल्ली के चोचले सुनते रहते हैं।
मसखरा आखिर मसखरा ही रहेगा उससे गम्भीर और जिम्मेदारी की उम्मीद करना व्यर्थ है। जैसा कि एक मसखरे का अभिनय यह होता है कि वह अकेले में डींगे हांकता है और किसी के सामने आने पर मजबूत के पक्ष में खड़ा हो जाता है। गिरगिट का रंग बदलने में समय लगता है परन्तु मसखरे को दायें से बायें पहुँचने में जितना वक्त लगे उतने में ही उसकी सूरत और सीरत बदल जाती है।
यहां भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। पाकिस्तान को घर में घुसकर मारने का स्वांग भरने वाला 56' सीना चीन बार्डर पर पहुंचते ही पंचर हो सिकुड़ कर 26' में परिवर्तित हो जाता है। जिस तरह भारतीय मर्यादाओं का अनुपालन करते हुए महिलाएं अपने जेठ का नाम नही लेती; उसी तरह 18 बार प्रधान सेवक और 4 बार राज्य सेवक के रूप में चीन को जेठ मान चुका 56' सीना चीन का नाम लिए बिना ही मुर्दहिया घाट जैसे मुरझाए चेहरों की तरह शर्म से पिलपिला हो बार्डर से खिसक लेता है।
धमनियों में बहुते हुए व्यवसाय के सिकन्दर से जो उम्मीद थी किया भी उसने वही। तथाकथित कोरोना काल में इतनी दूरी की यात्रा करने के उपरांत एक माडलिंग शूट तो बनता ही है। पारंगत जोकर अपनी परंपरा को तिलांजली कैसे दे सकता है?
शुरू हुआ शूट 153 जनरल सैनिक अस्पताल के ट्रेनिंग सेंटर में। अब अस्पतालों में इलाज का तरीका बदल गया है। अब दवा, पानी व खाद्य पदार्थ घायल व रोगी के पास नहीं अपितु वेटर के पास रहते हैं जो चीन निर्मित काल बेल वह हाजिर हो तीमारदारी में लग जाता है।
यदि आपको वास्तविक तौर पर देश से लगाव है तो अपने प्रधान सेवक से सवाल करें कि 20 सैनिकों की शहादत का जिम्मेदार कौन? फिंगर 4 से फिंगर 3 की तरफ बढ़ती चीनी सेनाओं को रोकने के लिए अपने जेठ से वह बात करेंगे या फिर इन भागों को चीन को सौंप आत्मीयता प्रदर्शित करेंगे या यह दावा करते हुए गाल बजाएंगे कि हमारी सीमा में न तो कोई घुसा है और न ही कोई कब्जा ही हुआ है।
वैसे मसखरों के शहंशाह आपसे सच्चाई और ईमानदारी की उम्मीद करना व्यर्थ है फिर भी आखिरी बार देश की खातिर अपनी माँ की शपथ खाते हुए सिर्फ एक भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री के नाते सच बोल दें कि क्या हम अपनी जमीन चीन के कब्जे से मुक्त करा सकते हैं या नही? मेहरबानी करें; यह जवाब चीन के दोस्त और मसखरे की हैसियत से न दें।
याद रहे व्यक्ति जीवन के पाप से वैभवशाली जिंदगी जी सकता है परन्तु इतिहास कब्र से निकाल कर लाशों का चीड़-फाड़ करता रहता है।
देशवासियों से अपील अपने शौक कम करे मजाकिया प्रहसन के लिए नौटंकी देखें ,जोकर प्रधानमंत्री न बनाएँ।
गौतम राणे सागर। दर्दे इंडिया न्यूज।

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