ऐसी व्यवस्था का मैं पतन चाहता हूं जिसके कारण इस देश में बेरोजगारी' गरीबी' महंगाई 'ने लोगों का जीवन छीन लिया है

16नवंबर 2023

" महामहिम राष्ट्रपति महोदया" 

मेरा एक ही बेटा है. वही मेरा सहारा है"वह रिक्शा चलाता है"
                                 सागर की मां        

" मेरी बेटी ने मजबूरी में ऐसा किया है"  

                                      नीलम की मां

बेरोजगारी एवं गरीबी से परेशान युवा सदन से कहना चाहते थे कि "शानो शौकत एवं ऐश्वर्य का जीवन जीने वाले"जरा मेरे जीवन की भी परवाह करिये।

यदि'अहिंसात्मक अभिव्यक्ति" प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है तो सदन में धुआं छोड़कर किया गया प्रतिरोध संवैधानिक है और उनके लिए उन्हें जेल भेजा जाना संविधान की हत्या है। सरकार से यह निवेदन करता हूं कि युवाओं को रिहा कर दे।अन्यथा सत्य"अहिंसा"शांति के साथ  संसद पर सत्याग्रह करूंगा।


अहिंसात्मक" हथियार रहित" हिंसा रहित" ढंग से अपनी बात पहुंचाना। युवाओं पर UAPA क्यों लगाया? उन्हें जेल क्यों भेजा गया? सदन में बैठने वाले सांसद कुर्सियां फेंक सकते हैं गालियां दे सकते हैं हाथापाई कर सकते हैं "हमारी चमड़ी उधेड़ने"हमारे पेट की अंतड़ी निकलने वाले कानून बना सकते हैं और हम सदन में धुआं भी नहीं फेंक सकते। यदि  किसी को जेल भेजना ही है तो बेरोजगारी' गरीबी' विषमता' महंगाई' अपराध' भ्रष्टाचार' बलात्कार' हिंदू मुस्लिम नफरत' भय जातीय जहर को जेल भेजिए यानी जिन माननीयों पर रेप' करप्शन' क्राइम' का आरोप है  उनको जेल भेजा जाए।  संसद पर जितना अधिकार 545 और 243 सांसदों का है उतना ही अधिकार 142 करोड लोगों का है


उन सांसदों को लानत है जिनके क्रूर हांथों ने अहिंसात्मक प्रतिरोध कर रहे इन युवाओं की पिटाई कर दीं। युवाओं को  पीटने वाले सांसद नहीं जानते थे कि वे "मदर ऑफ डेमोक्रेसी' की धुनाई कर रहे है। जब उन्हें जेल भेजा गया तो यकीन मानिए आपने उस "महान संविधान" की हत्या कर दी जिसकी प्रत्येक पंक्तियां 'जीवन की हिफाजत' के लिए लिखी गई है।  


नहीं नहीं यह तो "अंधेर नगरी" है। यह अन्याय की नगरी है। यहां चोर'बलात्कारी' अपराधी लफंगें सट्टेबाज"शराबी" इंसानी नफरत फैलाने वाले माननीय हैं और बेगुनाह' को सजा दी जा भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाटक अंधेर नगरी (1882 )

ऐसी व्यवस्था का मैं पतन  चाहता हूं जिसके कारण इस देश में बेरोजगारी' गरीबी' महंगाई 'ने लोगों का जीवन छीन लिया है ।

किससे पूछूं की संसद की सुरक्षा अहम है? या जीवन? सुरक्षा तो 80 करोड लोगों के जीवन की है जो 5 किलो अनाज में अपने जीवन की तलाश कर रहे हैं 

आजादी के 76 साल बीतते बीतते भारत बेरोजगारी गरीबी विषमता महंगाई चोरी लूट भ्रष्टाचार अपराध नारी बलात्कार हिंसा हिंदू मुस्लिम नफरत जातीय जहर शराब बेचने का मुल्क बन गया है। कारण 'व्यवस्थापिका' 'कार्यपालिका' 


बहरी"अंधी"सरकार को सुनाने एवं दिखाने का इससे 'शांति वादी' तरीका इतिहास में नहीं मिलता। 

            मैं इसे रिवॉल्यूशन विद पीस" कहता हूं

अंतिम प्रश्न यह की सदन में युवाओं पर हाथ छोड़ने का हक किसने दिया है? यदि आप चाहते हैं कि इस महान मुल्क का महान संविधान" और मदर ऑफ डेमोक्रेसी" बची रहे तो सबसे पहले उन युवाओं को रिहा करिए और अपनी आत्मा से पूछिए कि क्या उन युवकों पर हाथ छोड़ना चाहिए ? 


भगत सिंह का समाजवाद"गांधी का स्वराज अंबेडकर का संविधान चाहिए"

सत्य एवं अहिंसा की जितनी जरूरत निजी जीवन में है उससे अधिक सार्वजनिक जीवन में।


प्रतिलिपि:-- माननीय लोकसभा अध्यक्ष गृह मंत्री


पूर्वांचल गांधी 

9415418263         9415282102

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