*कुशीनगर*
नगरपालिका परिषद कुशीनगर के वार्ड न.06 बाबा साहब आपटे नगर सिरसिया में चल रहें नौ दिवसीय श्रीराम महायज्ञ के छठे दिन कथा वाचक उमाशंकर पाण्डेय श्रद्धालुओं क़ो कथा का रसपान कराते हुए कहा कि जहाँ गुरु का सम्मान न हो वहाँ नहीं जाना चाहिए l एक प्रसंग के माध्यम से उन्होंने कहा कि एक समय की बात है, राजा इंद्र की सभा चल रही थी, और वहाँ बिना बुलाये गुरु बृहस्पति पहुंच गए, जहाँ किसी ने उनका आदर सम्मान नहीं किया, जिससे नाराज होकर चले गए और इंद्र के विनाश का श्राप दे दिए, जिससे सारे देवता घबराकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे l भगवान विष्णु ने उपाय बताते हुए कहा कि इसका समाधान तुष्टा ऋषि ही कर सकते हैं, इसलिए उनके पुत्र विश्वरूप के पास प्राण कवच है l विश्वरूप का तीन मस्तक था, पहले से प्राण कवच पाठ करते थे, दूसरे से हवन करते थे और तीसरे से सूरा पान करते थे l इंद्र ने विश्वरूप का पैर छूने के लिए झुके तो विश्वरूप सुरापान किए हुए थे, जिससे नाराज होकर इंद्र ने उनका सर काट दिए,जिससे ब्रह्म हत्या का दोष लग गया l इधर पुत्र की हत्या का खबर सुन ऋषि तुष्टा क्रोधित हो गए और इंद्र का बध करने के लिए वृत्ता सूर क़ो पैदा किए l वृत्ता सूर से परेशान होकर इंद्र फिर विष्णु के पास पहुंचे और बचने का उपाय पूछा l विष्णु ने बताया कि मुनि दधीचि के हड्डी का बजर बना कर वृत्ता सूर का वध किया जा सकता है l सभी देवताओं के आग्रह पर दधीचि ने अपनी हड्डी इंद्र क़ो दान कर दिया, जिससे इंद्र ने बजर बनाकर वृत्ता सूर का वध किया l और सभी देवताओं का उद्धार किया l देवताओं के बिजय पर सैकड़ो श्रद्धालुओ के जयकारे से पंडाल गूंज उठा और आज का कथा समाप्त हुआ l इस दौरान आयोजक व्यास दुबे, पूर्व प्रधान चन्द्रिका वर्मा,सभासद प्रकाश चंद्र भारती,कृष्णमुरारी दुबे, पूर्व सभासद अनिल वर्मा, आदर्श प्रताप सिंह, राम विश्वास दुबे, मुन्ना सिंह, लप्पू दुबे, प्रदीप, राधेश्याम, दिनेश यादव आदि सहित सैकड़ो की संख्या में भक्त व श्रद्धालु मौजूद रहे l
*दिनेश जायसवाल की रिपोर्ट*
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