“मौलाना आज़ाद हमारे लिए शिक्षा, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की मुकम्मल मिसाल हैं:प्रो. जमशीद कमर

 मौलाना आज़ाद मेमोरियल अकादमी लखनऊ द्वारा देश के प्रथम शिक्षा मंत्री, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की 68 वीं पुण्यतिथि  पर 
 शैक्षिक एवं वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन ।

लखनऊ  22 फरवरी मौलाना आज़ाद मेमोरियल अकादमी लखनऊ  द्वारा देश प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की 68 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पुस्तकालय सभागार, औरंगाबाद खालसा, बिजनौर रोड, लखनऊ में एक संगोष्ठी शीर्षक 
“शिक्षा, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय — विकसित भारत 2047 के संदर्भ में”  का आयोजन किया गया।
जिसमें देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों औरबुद्धजीवियों  ने भाग लिया।
कार्यक्रम का आरंभ अकादमी के जनरल सेक्रेटरी डॉ. अब्दुल कुद्दूस हाशमी के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने विषय के शैक्षिक, सामाजिक और वैचारिक आयामों का व्यापक विवेचन करते हुए कहा कि शिक्षा राष्ट्रीय जागरूकता की नींव, लोकतंत्र , जन  सामूहिक आत्मा और सामाजिक न्याय,  राष्ट्रीय स्थिरता की मजबूत गारंटी है। उन्होंने युवाओं को ज्ञान, नैतिकता और जिम्मेदार नागरिक  बनने का आवाहन किया।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर जमशीद कमर,( पूर्व अध्यक्ष उर्दू विभाग, रांची विश्वविद्यालय )ने कहा कि मौलाना आज़ाद शिक्षा, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के स्थायी प्रेरणास्रोत हैं। उनके जीवन, व्यक्तित्व और विचारों के विविध आयामों में इन मूल्यों की स्पष्ट झलक मिलती है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसके शैक्षिक स्तर, विचार स्वतंत्रता और सामाजिक समानता से निर्धारित होती है, और मौलाना आज़ाद को किसी न किसी विचारधारा या विषय के संदर्भ में निरंतर याद किया जाना चाहिए।
प्रोफेसर सोफिया अहमद (विधि विभाग, अंबेडकर विश्वविद्यालय) ने कहा कि संवैधानिक मूल्यों और कानून की सर्वोच्चता ही सामाजिक न्याय को व्यवहारिक रूप देती है। 

शिक्षित नागरिक न केवल अपने अधिकारों को समझते हैं, बल्कि दूसरों के अधिकारों के सम्मान को भी बढ़ावा देते हैं — जो एक सशक्त लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला है।
प्रोफेसर रुद्रप्रसाद साहू (सोशल  एक्सक्लूजन विभाग अम्बेडकर विश्वविद्यालय) ने कहा कि विकास तभी सार्थक है जब समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों को समान अवसर प्राप्त हों। सामाजिक समावेशन और अवसरों की समानता स्थायी राष्ट्रीय विकास के लिए अनिवार्य हैं।
डॉ. मनी राम,  (स्टेट तकमील-उत-तिब  मेडिकल कॉलेज )ने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक प्रशिक्षण और मानवीय मूल्यों का विकास अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य जागरूक, जिम्मेदार और समाजसेवी नागरिक तैयार करना है।
प्रोफेसर सफिया लोखंडे( स्टेट  तकमिलुतिब मेडिकल कॉलेज )ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक सहभागिता राष्ट्रीय विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ है। समान अवसर और सामाजिक सम्मान के बिना संतुलित विकास संभव नहीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता इंडियन इयर फोर्स  के ग्रुप कैप्टन दिनेश चंद्र (सेवानिवृत्त),  ने की। उन्होंने कहा कि सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए शिक्षा, अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता अत्यंत आवश्यक हैं। युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करना समय की मांग है।
इस अवसर पर अकादमी द्वारा मौलाना आज़ाद के जीवन और योगदान पर फोटो प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। साथ ही विभिन्न शैक्षिक एवं साहित्यिक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा नकद पुरस्कार और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।
अंत में अध्यक्ष शारिक अलवी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए यह संकल्प व्यक्त किया कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु शिक्षा, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के मूल्यों को बढ़ावा देकर एक जागरूक, एकजुट और विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास किए जाते रहना होगा 

जारीकर्ता:
अब्दुल कुद्दूस हाशमी
मोबाइल: 9336984433

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