शाहजहाँपुर क्या उत्तर प्रदेश में जीरो टॉलरेंस का नारा सिर्फ कागजों तक सीमित है यह सवाल आज शाहजहाँपुर का हर वो नागरिक पूछ रहा है जिसने खिरनी बाग मैदान के हालात देखे हैं यहाँ पुवायां और जलालाबाद से आए दर्जनों परिवार सात दिनों से आमरण अनशन पर हैं लेकिन जिला प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नहीं टूट रही।
कब्ज़ा कटान और कराहती इंसानियत
मामला सीधे तौर पर भू माफियाओं और दबंगई से जुड़ा है।
पीड़ितों का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी ज़मीन पर न सिर्फ कब्ज़ा किया गया, बल्कि उनके हरे भरे पेड़ों को भी काट दिया गया जब पुलिस और तहसील से न्याय नहीं मिला, तो ये परिवार राजधानी के करीब जिला मुख्यालय के नाक के नीचे बैठने को मजबूर हो गए
एक अंधी माँ की मूक पुकार
धरने पर बैठी एक बुजुर्ग महिला जो देख पाने में असमर्थ हैं,
कहती हैं साहब आँखें नहीं हैं तो क्या हुआ भूख और बेइज्जती तो महसूस होती है उनके साथ मौजूद मासूम बच्चे जो शायद धरना शब्द का अर्थ भी नहीं जानते अपनी माँ की गोद में भूख से बिलख रहे हैं
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