संवाददाता आलोक तिवारी
मथुरा। जिला सूचना विभाग में आउटसोर्सिंग पर तैनात एक कम्प्यूटर ऑपरेटर द्वारा अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने उसे आखिरकार दबोच लिया। कई दिनों से पुलिस को चकमा दे रहा था आखिर पुलिस ने आरोपी को गुरुवार सुबह इटावा से गिरफ्तार कर लिया गया।
थाना सदर बाजार पुलिस ने बताया कि आरोपी नारायन सिंह (27) पुत्र स्व. भीम सिंह निवासी चौमुहा मनीथोक थाना जैत, मथुरा जिला सूचना विभाग में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत था। आरोप है कि उसने जिला सूचना अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर गलत तरीके से बिल तैयार किए और सरकारी धन के दुरुपयोग का प्रयास किया।
इस संबंध में जिला सूचना अधिकारी प्रशांत कुमार सुचारी की तहरीर पर थाना सदर बाजार में मुकदमा अपराध संख्या 37/26 दर्ज किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद से आरोपी फरार चल रहा था और लगातार अपनी लोकेशन बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर सदर बाजार थाना पुलिस की टीम ने इटावा जनपद के एकदिल थाना क्षेत्र स्थित शांति विहार कॉलोनी में दबिश दी और गुरुवार सुबह करीब 4:45 बजे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले से भी एक अन्य मामला थाना जमुनापार में आईटी एक्ट और बीएनएस की धाराओं में दर्ज है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।
इस कार्रवाई को प्रभारी निरीक्षक सुधीर सिंह के नेतृत्व में उपनिरीक्षक मोनू कुमार, उपनिरीक्षक नितिन शर्मा, हेड कांस्टेबल उपदेश यादव और कांस्टेबल अंकुर यादव की टीम ने अंजाम दिया।
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अब उठ रहे कई बड़े सवाल
सूचना विभाग में सामने आए इस फर्जीवाड़े ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। आखिर एक आउटसोर्सिंग कर्मी को इतनी पहुंच कैसे मिल गई कि वह अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर तक कर सके?क्या विभागीय स्तर पर निगरानी की व्यवस्था कमजोर थी?और क्या इस पूरे खेल में कोई और भी शामिल है? मामले की गहन जांच कराई जाए तो इस फर्जीवाड़े के पीछे छिपे कई और चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं। पकड़ने के बाद पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और उम्मीद है कि पूछताछ में इस ‘फर्जीवाड़े की फाइल’ के कई और पन्ने खुल सकते हैं।
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