सेवा में
'अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक'
गोरखपुर
विषय :-
साजिश' अपराध 'भय' दहशत की प्रतीक थाना शाहपुर पुलिस के प्रभारी थानाध्यक्ष राकेश रोशन सिंह SSI राकेश कुमार सिंह SI सत्यम सिंह पवन यादव अभिषेक सिंह अन्य SI जो मुझे 11 जून को 11:00 amके आसपास घर पर बुलाने आए थे।
सत्यपथ इकलौता मार्ग है जिस पर मैं चलता हूं
10 जून सवेरे 8:00 के आसपास दो सब इंस्पेक्टर आए बोले आज पुलिस की परीक्षा है आप सत्याग्रह मत करिए मैं मान लिया और सत्याग्रह 22 जून को करना तय हुआ। 11 जून को सवेरे लगभग 11:00 बजे थाने से 2 SI आए बोले SO बुला रहे हैं। दोनों SI बेटों के साथ चाय पी अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटी से थाने गया थानाध्यक्ष से पूछा क्यों बुलाया गया है उन्होंने कुछ बताया नहीं चाय पिलाया 2 घंटे तक मुझे कंप्यूटर रूम में बैठाया गया उसके बाद मुझे जिला चिकित्सालय इमरजेंसी वार्ड में ले जाकर मेडिकल कराया गया वहां से मजिस्ट्रेट के कोर्ट में ले जाया गया लगभग 4:00 बज रहा था। मजिस्ट्रेट कोर्ट में नहीं थे।
उन्होंने न मुझे देखा न मैंने उन्हें देखा।जेल भेजने के पेपर पर कहीं से हस्ताक्षर हस्ताक्षर कर के लाया गया 151 में आपको जेल भेजा जा रहा है मुझे 5 दिन जेल में रखा गया 15 को रिहा किया गया।मुझे नहीं पता मुझे क्यों जेल भेजा गया? मजिस्ट्रेट ने मुझसे पूछना बताना उचित नहीं समझा उन्होंने मुझे जेल क्यों भे. जा ? अभी नकल तो नहीं आई है लेकिन मुझे बताया गया की पुलिस ने मजिस्ट्रेट को अपडेट किया कि विश्वविद्यालय में अपनी पुर्नबहाली नियुक्ति को लेकर मैं घर से चिल्लाते हुए HN सिंह चौराहे पर आत्मदाह करने की कोशिश की पुलिस जब रोकी तो उससे हाथापाई मारपीट करने लगे ''पुलिस की वर्दी पहनकर साजिश रचकर जेल भेजने का यह ऐसा अपराध है जिसे अपने जीवन के अंतिम सांस तक नहीं भूल पाऊंगा"।
संदर्भ में मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि 'मेरे 60 वर्ष की उम्र में यदि मेरे द्वारा आत्मदाह करने और किसी पुलिस सिपाही की वर्दी को हाथ लगाने का प्रमाण मिलेगा तो अपना सारा जीवन कारागार में गुजार दूंगा''। माननीय राष्ट्रपति माननीय मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय को 1000 से अधिक पत्र लिखा हूं उसमें मैंने प्रेसिडेंट मुख्यमंत्री गवर्नर आदि के पुतले जलाने अनशन करने सत्याग्रह करने धरना देने आदि की बात लिखा हूं परंतु आत्मदाह कर लूंगा' दूसरे की हिंसा कर दूंगा यह शब्द यदि मिल गया तो जो सजा दी जाएगी मंजूर करूंगा
15 जून को लगभग 3:00 बजे जेल से रिहा होकर मैं घर आया क्योंकि मेरी तबीयत पूर्व से खराब थी जेल में 5 दिन में तीन दिन मुझे चिकित्सा वैरक में रखा गया दो ड्रिप चढ़ाया गया। 15+जून की 2:00 बजे रात्रि के बाद मेरा सांस फूलने लगा आंखों के आसपास सूजन हो गया गर्म पानी लिया चाय पिया सवेरे 6:00 बजे के आसपास कुछ राहत मिली। मैं 9:00 बजे के लगभग एंबुलेंस बुलाया ताकि जिला चिकित्सालय जा सकूं।
जहाँ, पूर्व से मेरा इलाज अनशन सत्याग्रह दौरान/ उपरांत होता है एंबुलेंस अभी आई नहीं थी कि थाने से चार si दरवाजे पर पहुंच गए। एंबुलेंस आई एंबुलेंस में मैं बैठने की कोशिश कर रहा था पुलिस बर्बरता क्रूरता दमन पूर्ण ढंग से मुझे एंबुलेंस में बैठने से रोक दिया मेरी पत्नी और मै बात करता रहा नहीं माने।जबरदस्ती एंबुलेंस को वापस कर दिए।
फिर मैंने एसपी सिटी निमिष पाटिल जी को फोन किया। उन्होंने कहा अभी मैं बात करता हूं तब तक थानाध्यक्ष की गाड़ी गेट पर आ गई।गेट पर ही खड़े थे चले गए। मैं अंदर बैठा था पुलिस ने बताया कि दोबारा एंबुलेंस मंगवा लीजिए चले जाइए।मैं दोबारा एंबुलेंस मंगवाई और एंबुलेंस में बैठने लगा उसी में जबरदस्ती पुलिस बैठाया नीचे SI i पवन यादव था एंबुलेंस आगे बढी। विक्रम सिंह चौराहे से एंबुलेंस को मेडिकल कॉलेज की तरफ मोड़ दिया चार SI एंबुलेंस को जबरदस्ती मेडिकल कॉलेज ले गए मैं अंदर से बोलता रहा लेकिन जैसे किसी का जीवन हाईजैक किया जा रहा हो मैं अंदर तड़प रहा था एंबुलेंस बंद थी सिपाही अंदर था।अमनुष्यता की पराकाष्ठा दमन की पराकाष्ठा। मेरे जीवन को पुलिस छीन रहे थे। यह पूरा सिस्टम मेरे लिए बेकार था मैं बंद गाड़ी में था। वहां पहुंचा एंबुलेंस से निकला. तभी ही SI पवन ने एक सिपाही को कहा जल्दी उनके नाम रसीद कटा लो।
मेरे विरोध के बावजूद मेरे नाम रसीद कटवा लिया फिर मैं एसपी सिटी निमेष पाटिल जी को फोन किया।उन्होंने इन गुंडे अपराधियों से कुछ बात किया होगा फिर मेरी गाड़ी लौटा कर जिला चिकित्सालय इमरजेंसी में जहां मैं सवेरे ही अपनी तबीयत खराब की सूचना सीएमओ को और वरिष्ठ डॉ सुमन जी को दे दी थी। यह भी बताई थी कि पुलिस जबरदस्ती मुझे रोक रही है। मुझे इलाज के लिए आने नहीं दे रही है।मैं इमरजेंसी में पहुंच मेरी पत्नी वहां मौजूद थी। वहां भी SI सत्यम सिंह पहुंचा और कहने लगा कि केवल दवा दे दीजिए यहां भर्ती मत करिए मैं ले जाऊंगा। ड्यूटी पर बैठे डॉक्टर ने कहा उनकी तबीयत ठीक है।
परंतु पुलिस ने कहा बात कर रहे हैं चल रहे हैं। मेरी तबीयत 6:00 बजे am से कुछ ठीक हो गई थी मुझे प्राइवेट वार्ड कमरा नंबर 7 में भर्ती कराया गया।ड्रिप चढ़ाया गया सुई लगाई गई ड्रिप में विटामिन आदि डाले गए अगले दिन यानी कल 17 तारीख को मेरा चेस्ट एक्सरे हुआ ECG हुआ एक ब्लड की रिपोर्ट आई।मेरे फेफड़ों में सूजन है उसके लिए दवा दी गई इसके पश्चात मुझे डिस्चार्ज कर दिया गया मैं कल रात्रि 9:00 बजे घर पहुंचा
पुलिस ने मुझपर आत्मदाह और पुलिस के साथ हाथापाई मारपीट करने का आरोप क्यों लगाया
हॉस्पिटल जाने से 16 जून को पुलिस ने मुझे बलपूर्वक अपराधिक ढंग से क्यों रोका? एंबुलेंस वापस क्योंकर दिया मेरे जीवन का सौदा पुलिस कर रही थी इससे भी बड़ा कोई क्रूर जालिमाना हो सकता है क्या?
रात में मेरा दम फूल रहा था सवेरे में थोड़ा ठीक हुआ तो हॉस्पिटल जा रहा था आखिर वर्दी में इन इन अपराधियों को किसने भेजा था?मेरे दरवाजे पर किस बात के लिए भेजा था? क्या इस अपराध की जानकारी आपको है?
अंतिम बात ऐसे झूठे आरोप लगाकर मुझे जेल भेजने से अच्छा है वर्दी धारी इन अपराधियों को भेज दें मेरी हत्या करके चले जाय.अपने जीवन के अंतिम सांस तक अब वर्दी पर ट्रस्ट नहीं कर सकता। वर्दी क्रूर है हत्यारी है। जालिम।मेरी मानसिक पीड़ा शारीरिक पीड़ा समाज में मेरे प्रति लोगों का दृष्टिकोण? 99% लोग 151 नहीं जानते जेल का मतलब अपराध जानते हैं।
पूर्व से मानसिक रोगी मेरी पत्नी की मानसिक स्थिति पुनः बिगड़ गई और कल हॉस्पिटल में मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ अमित शाही को दिखाया।
पुलिस किसी समय मेरे'एवं मेरे परिवार पत्नी एवं बेटा जो लिटिल फ्लावर धर्मपुर में पढता है,हत्या कर देगी।किसी तरह की साजिश रच सकती हैं क्योंकि साजिश रचना हत्या करना पुलिस का मौलिक कर्तव्य बन गया है। गांधी के जिंदा रहते गांधी पर आत्मदाह और पुलिस से हाथापाई करने का आरोप लगा कर जेल भेज दिया अस्पताल में इलाज के लिए जाने से बलपूर्वक रोका। ये हथियार से लैस हैं।
कभी एनकाउंटर कर सकते हैं अब भरोसा टूट चुका है बिल्कुल टूट चुका है.कभी हत्या कर सकते हैं। वर्दी के अंदर छिपे इन अपराधियों को मेरे दरवाजे पर न भेजें यदि हत्या के नाम पर सुई चुभोने चोरी के नाम पर सुई चोरी और कानून व्यवस्था बिगाड़ने के नाम पर आपके पास कोई प्रमाण मिले तो मुझे जेल भेज दिया जाए। लेकिन इन अपराधियों को मेरे घर न भेजें। अब तो इन लोगों ने मेरी इज्जत लूट ली है मेरा सम्मान खाक में मिला दिया साजिश रच कर जेल भेजा मेरी बहन ने रोते हुए पत्नी से फोन पर बताया 'का उनके इज्जत के लाज नईखे' 99% लोग 151 नहीं जानते। यही जानते हैं कि अपराधी' चोर जेल जाते हैं।उत्तर प्रदेश पुलिस मानहानि स्वरूप 10 करोड़ दें।
प्रति मा मुख्य न्यायाधीश HC इलाहाबाद प्रयागराज
श्रीमान मुख्य सचिव सचिव गृह डीजीपी उत्तर प्रदेश
डॉ संपूर्णानंद मल्ल
पूर्वांचल गांधी
9415418263
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