गुल्लक तोड़कर बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आईं दो बहनें

रिद्धिमा और लावण्या ने फैजुल्लागंज में बांटी राहत सामग्री, मदद के साथ बचाए पीड़ितों के आत्मसम्मान की गरिमा
लखनऊ। फैजुल्लागंज क्षेत्र में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए अलीगंज, लखनऊ की दो बहनें रिद्धिमा पाण्डेय और लावण्या पाण्डेय आगे आईं। दोनों बहनों ने अपनी गुल्लक में वर्षों से संजोई गई धनराशि को जरूरतमंदों की सहायता के लिए खर्च करते हुए बाढ़ पीड़ित परिवारों के बीच राहत सामग्री वितरित की।

रिद्धिमा पाण्डेय नीट की तैयारी कर रही हैं, जबकि उनकी छोटी बहन लावण्या पाण्डेय सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS), अलीगंज शाखा-2 में कक्षा 4 की छात्रा हैं। छोटी उम्र में लावण्या और उनकी बड़ी बहन रिद्धिमा का यह प्रयास समाज के प्रति संवेदनशीलता और सेवा की भावना का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
इस पहल की सबसे खास बात यह रही कि दोनों बहनों ने राहत सामग्री वितरित करते समय पीड़ितों की तस्वीरें नहीं खिंचवाईं। उनका मानना था कि आपदा की स्थिति में सहायता प्राप्त कर रहे किसी व्यक्ति की फोटो लेकर उसे सार्वजनिक करना उसके आत्मसम्मान और स्वाभिमान को ठेस पहुंचा सकता है।
रिद्धिमा और लावण्या ने सहायता को प्रचार का माध्यम बनाने के बजाय इसे मानवता की जिम्मेदारी माना। उनका यह विचार विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मदद ऐसी होनी चाहिए, जिसमें जरूरतमंद व्यक्ति को सहायता का एहसास तो हो, लेकिन अपनी असहाय स्थिति का सार्वजनिक प्रदर्शन न महसूस हो।
बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के समय आमतौर पर बड़ी-बड़ी संस्थाओं और संगठनों की ओर से राहत कार्य किए जाते हैं, लेकिन इन दो बहनों ने अपनी छोटी-सी बचत से यह संदेश दिया कि समाज सेवा के लिए उम्र या आर्थिक सामर्थ्य से अधिक महत्वपूर्ण संवेदना और इच्छाशक्ति है।

रिद्धिमा और लावण्या का यह प्रयास केवल राहत सामग्री बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी को करुणा, सेवा, संवेदनशीलता और मानवीय गरिमा का पाठ भी पढ़ाता है। उनकी गुल्लक से निकली राशि भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन उससे निकली भावना निश्चय ही बड़ी है।
इन दोनों बहनों ने यह साबित किया कि सच्ची सेवा वह है, जिसमें देने वाले का नाम नहीं, बल्कि जरूरतमंद की गरिमा सबसे महत्वपूर्ण होती है। उनका मानना है कि उनको उनका यह मानना है कि उनको या संस्कार उनकी मां श्री मती रेखा पाण्डेय से मिले

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