मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी ने अपनी कलम, वाणी और चरित्र के माध्यम से अहले बैत की फ़ज़ीलत, अज़मत और हज़रत इमाम हुसैन (रज़ि.) के सार्वभौमिक संदेश को जन-जन तक पहुँचाया : मोहम्मद फ़ारूक़ ख़ान चाँद

लखनऊ, 2 जुलाई: तहफ़्फ़ुज़-ए-औक़ाफ़ सोसाइटी के तत्वावधान में अशरफ़ाबाद, लखनऊ स्थित प्रसिद्ध व्यापारी एवं समाजसेवी मोहम्मद फ़ारूक़ ख़ान चाँद के आवास पर एक शोकसभा आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता स्वयं मोहम्मद फ़ारूक़ ख़ान चाँद ने की। सभा में दारुल उलूम नदवतुल उलेमा के पूर्व अध्यापक, जामिया सैयद अहमद शहीद के नाज़िम, प्रख्यात इस्लामी विद्वान, मुहद्दिस, मुफस्सिर, शोधकर्ता, चिंतक, लेखक एवं मुस्लिम समाज की प्रतिष्ठित बौद्धिक हस्ती मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी के निधन को धार्मिक, शैक्षिक एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपूरणीय क्षति बताते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
अध्यक्षीय संबोधन में मोहम्मद फ़ारूक़ ख़ान चाँद ने कहा कि मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी अपने दौर के उन विशिष्ट इस्लामी विद्वानों में थे जिन्होंने ज्ञान, आचरण, दावत, समाज-सुधार, शोध, लेखन और दूरदर्शी नेतृत्व को अपनी शख्सियत में समाहित कर लिया था। उनका संपूर्ण जीवन इस्लाम के प्रचार, उम्मत के मार्गदर्शन और समाज के वैचारिक निर्माण के लिए समर्पित रहा। छात्र जीवन से लेकर अंतिम सांस तक उन्होंने अपनी कलम, वाणी और चरित्र के माध्यम से अहले बैत तथा हज़रत इमाम हुसैन (रज़ि.) के सार्वभौमिक संदेश का प्रचार-प्रसार किया और आधुनिक वैचारिक एवं सांस्कृतिक चुनौतियों का क़ुरआन और सुन्नत के आलोक में संतुलित, तार्किक एवं प्रभावी उत्तर प्रस्तुत किए।
उन्होंने कहा कि मौलाना की विचारधारा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष अहले बैत-ए-रसूल से प्रेम और उनके सम्मान का प्रसार था। उन्होंने क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में अहले बैत की महानता, प्रतिष्ठा और हज़रत इमाम हुसैन (रज़ि.) के आदर्शों को व्यापक रूप से प्रस्तुत किया तथा इस विषय में फैली अनेक भ्रांतियों का विद्वत्तापूर्ण और शोधपरक निराकरण किया। अपने व्याख्यानों, शिक्षण तथा लेखन के माध्यम से उन्होंने सीरत-ए-अहले बैत, विशेष रूप से हज़रत इमाम हुसैन (रज़ि.) के चरित्र, विचार और पैग़ाम-ए-हुसैनी को इस प्रकार लोगों तक पहुँचाया कि समाज में अहले बैत से प्रेम, संतुलित सोच, भाईचारा और मुस्लिम एकता को नई शक्ति मिली। इस क्षेत्र में उनकी सेवाएँ सदैव सम्मान के साथ याद की जाएँगी।
उन्होंने कहा कि मौलाना आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप धार्मिक शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। वे हमेशा इस बात पर बल देते थे कि मुसलमान क़ुरआन शरीफ़ को केवल तिलावत की पुस्तक न समझें, बल्कि उसे अपने जीवन का मार्गदर्शक और संविधान बनाएँ। उन्होंने मदरसों की शिक्षा में आधुनिक विषयों को शामिल करने की वकालत की तथा जामिया सैयद अहमद शहीद, कटौली की स्थापना के माध्यम से ऐसा शैक्षणिक संस्थान विकसित किया जो दीन और आधुनिक शिक्षा के सुंदर समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनके अनुसार सुदृढ़ ज्ञान के साथ श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण ही समाज और राष्ट्र की वास्तविक उन्नति का आधार है।
मोहम्मद फ़ारूक़ ख़ान चाँद ने कहा कि मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी जैसी विलक्षण, दूरदर्शी और बहुआयामी शख्सियत का इस दुनिया से चले जाना मुस्लिम समाज के लिए अत्यंत बड़ी क्षति है, जिसकी भरपाई सहज संभव नहीं। उन्होंने बताया कि वे मौलाना के परिजनों से मिलकर अपनी गहरी संवेदना और शोक व्यक्त कर चुके हैं।

मौलाना आज़ाद मेमोरियल अकादमी के महासचिव डॉ. अब्दुल कुद्दूस हाशमी ने कहा कि मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी के हृदय में नई पीढ़ी, विशेषकर महिलाओं और बेटियों की धार्मिक एवं आधुनिक शिक्षा के प्रति गहरी चिंता थी। उनका मानना था कि शिक्षित, संस्कारित और चरित्रवान माताएँ ही समाज और राष्ट्र का सुदृढ़ भविष्य तैयार कर सकती हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने लखनऊ एवं आसपास के क्षेत्रों में जामिया लिल-बनात की स्थापना के प्रयासों को बढ़ावा दिया तथा मदरसों के पाठ्यक्रम को समय की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए निरंतर कार्य किया।
मौलाना एहसान नदवी ने कहा कि मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी मेरे आदरणीय गुरु थे। मैंने उन्हें शिक्षा, दावत, सामाजिक सुधार और सामुदायिक विषयों पर सदैव निर्भीक, संतुलित और दूरदर्शी मार्गदर्शन करते हुए देखा। उनकी सोच व्यापक, संतुलित और उम्मत की भलाई पर आधारित थी, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ भी लाभान्वित होती रहेंगी।
तहफ़्फ़ुज़-ए-औक़ाफ़ सोसाइटी के संरक्षक तौहीद सिद्दीकी ने कहा कि मरहूम औक़ाफ़ संरक्षण आंदोलन के सशक्त प्रवक्ता थे। उनका मानना था कि यदि औक़ाफ़ की संपत्तियों का ईमानदारी, पारदर्शिता और सुव्यवस्थित योजना के साथ उपयोग किया जाए तो मुस्लिम समाज की शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है। वे औक़ाफ़ को समुदाय की अमानत और उसके विकास की आधारशिला मानते थे।
समाजसेवी सैयद सिराज ने कहा कि मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे। वे चाहते थे कि मुसलमान शिक्षा, एकता, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से देश और समाज की प्रगति में प्रभावी भूमिका निभाएँ।
शोकसभा के अंत में मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी की मग़फ़िरत, उच्च स्थान तथा उनके परिजनों के लिए धैर्य और सब्र की दुआ की गई।
जारीकर्ता:
मोहम्मद फ़ारूक़ ख़ान चाँद
तहफ़्फ़ुज़-ए-औक़ाफ़ सोसाइटी, लखनऊ
डॉ. अब्दुल कुद्दूस हाशमी
मो.: 9336984433

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