अपराध क्या है? नाव में चिकन बिरयानी खाना या गंगा में हड्डी फेंकना? अब सवाल यह है कि यह अपराध कैसे है? अगर यह अपराध है तो फिर इसी गंगा में अस्थियां विसर्जित की जाती हैं! तब तो वो भी अपराध है?
इसी गंगा के तट पर जगह-जगह शमशान घाट हैं, जली अधलजी लाशें उसमें बहा दी जाती हैं, तब तो वह भी अपराध है? इसी गंगा में जाने कितने ऐसे जीव हैं जो मांसाहारी हैं, तब उनका गंगा में रहना ही अपराध है? सरकार गंगा से उन तमाम जीवों को बाहर निकालेगी?
अगर गंगा में हड्डियां फेंकने की वजह से इन युवकों को गिरफ्तार किया गया है तो फिर गंगा में गंदगी फेंकने वालो को भी गिरफ्तार किया जाए! या फिर गंगा नदी पर किसी एक धर्म विशेष के लोगों का ही अधिकार है ‘दूसरों’ का कोई अधिकार नहीं है?
लेकिन यह कानून कब बना? इस देश की हर नदी चाहे गंगा हो या गोदावरी वह इस देश की संपदा है, इस देश की पब्लिक प्रॉपर्टी है। उस पर हर भारतीय का अधिकार है।
स्वतंत्र प्रिया गुप्ता की कलम से वशेष
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