धूमधाम के साथ मनाई गई पूर्णश्लोक का लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की301 वीं जन्म जयंती

 सीतापुर/सिधौली क्षेत्र के ग्राम सभा पारा में स्थित मां तपेश्वरी देवी मंदिर में पूर्ण श्लोक का लोकमत अहिल्या बाई होलकर संगठन के तत्वावधान में धूमधाम से मनाई गई राज माता आहिल्या बाई होल्कर की 301वीं जयंती सिधौली के पारा गाँव में धूम धाम से मनाई गई। 
इस अवसर पर लोगो ने महारानी के चित्र पर माल्यार्पण किया , कार्यक्रम का संचालन कर रहे ज्ञानेश पाल धनगर ने कहा  गड़रिया पाल बघेल  धनगर समाज के लोग देवी आहिल्या बाई होल्कर के वंशज है ,
महारानी का 31 मई सन 1725 ई० को हुआ था , 1767 में इनके पति व ससुर की मौत के बाद इंदौर का राज पाठ महारानी ने संभाला  महारानी ने पूरे देश में मंदिर, धर्मशालाये ,सरोवरों व् नदियो पर घाटों का निर्माण कराया। कुरुक्षेत्र में शिव सनातन महादेव मंदिर सन्निहित सरोवरों पर पंचकुंड व लक्ष्मी घाट का निर्माण करवाया ।
उह्नोंने समाज के लोगो को महारानी की शिक्षाओ का अनुश रण  करने और उनके बताये मार्ग पर चलकर समाज में फैली बुराईयों  को दूर करने की अपील और  कहा लोकमाता के समाज कल्याण  के लिये किये गये त्याग और बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता
वहीं मुख्य अतिथि रहे सिधौली विधानसभा विधायक मनीष रावत जी ने दीप प्रज्वलित कर सभा को संबोधित करते हुए कहा उनके नाम पर सरकार को पुरुस्कार आदि कार्यो को बढ़ाया जाना चाहिये लोकमाता पृथ्वी पर देवी का रूप थी । लोकमत अहिल्याबाई होलकर ने सर्वप्रथम
बघेल ,धनगर समाज के लोग देवी आहिल्या बाई होल्कर के वंशज है। महारानी का 31 मई सन 1725 ई. को हुआ था।1767 में इनके पति व ससुर की मौत के बाद इंदौर का राज पाठ महारानी ने संभाला। उन्होंने कहा कि लोकमाता के समाज कल्याण के लिये किये गये त्याग और बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता, उनके नाम पर सरकार को पुरुस्कार आदि कार्यो क चित्र 
उन्होंने समाज के लोगो को महारानी की शिक्षाओ का अनुसरण करने और उनके बताये मार्ग पर चलकर समाज में फैली बुराईयों को दूर करने की अपील किया। रानी अहिल्याबाई ने कलकत्ता से बनारस तक की सड़क, बनारस में अन्नपूर्णा का मन्दिर, गया में विष्णु मन्दिर बनवाये। इसके अतिरिक्त इन्होंने घाट बनवाए, कुओं और बावड़ियों का निर्माण करवाया, मार्ग बनवाए, भूखों के लिए सदाब्रत (अन्नक्षेत्र ) खोले, प्यासों के लिए प्याऊ बिठलाईं, मंदिरों में विद्वानों की नियुक्ति शास्त्रों के मनन-चिंतन और प्रवचन हेतु की।

लोकमाता के समाज कल्याण के लिये किये गये त्याग और बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता,  उनके नाम पर सरकार को पुरुस्कार आदि कार्यो को बढ़ाया जाना चाहिये लोकमाता पृथ्वी पर देवी का रूप थी ।

इस अवसर पर आचार्य यतींद्र  नाथ धनगर ,डॉक्टर अशोक पाल, अवधेशपाल, दीपक पाल, , राम नरेश पाल ,देवी प्रसाद पाल ,रंजीत पाल ,भानू प्रताप पाल ,सालिक पाल ,रमेश पाल सुरेश पाल 
प्रकाश पाल ,रामसागर पाल 
पिंटू पाल ,भैया लाल पाल 
अतर पाल ,कमलेश पाल ,लोटन पाल ,मोती पाल ,राजेश पाल
आशाराम पाल आदि भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे

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