प्रभु का निरंतर नाम स्मरण करने से मनुष्य का कल्याण संभव:ज्ञानेश


सीतापुर  सिधौली  क्षेत्र के ग्राम जयरामनगर  में आज समाज सेवियों द्वारा एक आध्यात्मिक गोष्ठी आयोजित कि गई एक विशेष आध्यात्मिक गोष्ठी में मुख्य वक्ता ज्ञानेश जी ने समाज को सही दिशा दिखाने और जीवन को सफल बनाने के लिए प्रभु भक्ति और सत्संग को अनिवार्य बताया। गोष्ठी को संबोधित करते हुए  ज्ञानेश ने कहा कि परमात्मा के नाम का निरंतर स्मरण करने से ही मनुष्य का वास्तविक कल्याण संभव है। 
सांसारिक सुख क्षणिक हैं, जबकि ईश्वर की भक्ति ही जीवन को परम आनंद और मोक्ष की ओर ले जाती है।मुख्य वक्ता ने अपने संबोधन में कहा की मन की शांति का एकमात्र मार्ग वर्तमान भागदौड़ भरी जिंदगी और तनाव के बीच केवल प्रभु का नाम ही मन को सच्ची शांति और सकारात्मक ऊर्जा दे सकता है।

विकारों से मुक्ती  प्रभु के स्मरण से मनुष्य के भीतर के अहंकार, क्रोध और लोभ जैसे विकारों का नाश होता है तथा दया, क्षमा और परोपकार जैसी मानवीय संवेदनाएं जागृत होती हैं।सरल और सुलभ साधना: ईश्वर का नाम लेने के लिए किसी कठिन कर्मकांड की आवश्यकता नहीं है। इसे किसी भी समय और परिस्थिति में सच्चे मन से किया जा सकता है।

गोष्ठी के समापन पर वक्ता ने सभी उपस्थित श्रद्धालुओं से अपने दैनिक जीवन में से कुछ समय ईश्वर की आराधना और समाज सेवा के लिए निकालने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध जन और स्थानीय नागरिक राजा राम ,संजय , सोनू ,अलोक, अर्चना देवी , सीमा , मोहिनी, सुरज  हर्षवर्धन,  विजय कुमार  सुनिल कौशल आदि उपस्थित रहे।

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