करामत कॉलेज में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित हुई संगोष्ठी, विकसित भारत 2047 में महिला सशक्तीकरण की भूमिका पर हुई चर्चा
लखनऊ, 4 नवंबर 2026। राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के अवसर पर करामत हुसैन मुस्लिम गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, लखनऊ के शिक्षा विभाग एवं मौलाना आज़ाद मेमोरियल अकादमी, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में कॉलेज के सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय
'मौलाना आज़ाद की शैक्षिक दृष्टि और विकसित भारत 2047 : महिला सशक्तीकरण की भूमिका' था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के अम्बेडकर स्टडी सेंटर के निदेशक प्रो. शशिकांत पाण्डेय थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में मौलाना आज़ाद मेमोरियल अकादमी, लखनऊ के महासचिव डॉ. अब्दुल क़ुद्दूस हाशमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्या प्रो. हुमा ख़्वाजा ने की।
मुख्य अतिथि प्रो. शशिकांत पाण्डेय ने अपने संबोधन में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की शैक्षिक दृष्टि और महिला शिक्षा के प्रति उनके विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि मौलाना आज़ाद स्त्री शिक्षा एवं स्त्री सशक्तीकरण के प्रबल समर्थक थे। वे महिला शिक्षा की उन्नति को समाज के समग्र विकास से जोड़कर देखते थे। उनका मानना था कि शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। उन्होंने परंपरागत शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा पर भी विशेष बल दिया।
प्रो. पाण्डेय ने कहा कि मौलाना आज़ाद के विचार अपने समय से बहुत आगे थे। वे लैंगिक समानता और सार्वभौमिक शिक्षा के पक्षधर थे। आज जब हम विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं, तब महिला शिक्षा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक विकास से पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग का शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व की भावना विकसित करना और चरित्र निर्माण करना भी होना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अब्दुल क़ुद्दूस हाशमी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए महिलाओं का शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर होना अत्यंत आवश्यक है। मौलाना आज़ाद की शैक्षिक सोच में महिलाओं की शिक्षा और समाज में उनकी समान भागीदारी का महत्वपूर्ण स्थान था। उन्होंने कहा कि महिला शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, बौद्धिक और नैतिक रूप से सक्षम बनाने पर भी ध्यान देना चाहिए। एक शिक्षित महिला न केवल अपने परिवार को बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी शिक्षित और जागरूक बनाती है। विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।
अध्यक्षीय संबोधन में कॉलेज की प्राचार्या प्रो. हुमा ख़्वाजा ने छात्राओं को शिक्षा के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का विकास करने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ज़माना उन्हें ही हरा सकता है, जिन्होंने आगे बढ़ने का इरादा छोड़ दिया हो। उन्होंने महिला शिक्षा के क्षेत्र में मौलाना आज़ाद के योगदान के साथ-साथ जस्टिस करामत हुसैन के ऐतिहासिक प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिला शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए किए गए उनके प्रयास आज भी प्रेरणादायक हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ दुआ से हुआ। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर किया गया। छात्राओं ने स्वागत गीत और ग़ज़ल प्रस्तुत की। साथ ही भाषण के माध्यम से मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।
शिक्षाशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. ख़ालिदा अख़्तर ने मुख्य अतिथि प्रो. शशिकांत पाण्डेय का परिचय प्रस्तुत करते हुए उनके शैक्षिक एवं अकादमिक योगदान की जानकारी दी। विभाग की डॉ. गुलनाज़ ख़ान ने विशिष्ट अतिथि डॉ. अब्दुल क़ुद्दूस हाशमी का परिचय दिया।
इस अवसर पर मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के जीवन, विचारों एवं शैक्षिक योगदान पर आधारित फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई। छात्राओं के लिए निबंध लेखन, पोस्टर निर्माण एवं नारा लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
शिक्षाशास्त्र विभाग की डॉ. शाहीन फ़ातिमा ख़ान ने अतिथियों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
डॉ अब्दुल कुद्दूस हाशमी
9336984433
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